सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट (SIC) एक ऐसा उत्पाद होता है, जिसमें ट्रांजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटक (जैसे डायोड, रेसिस्टर और कैपेसिटर) एक सेमीकंडक्टर सामग्री (जैसे सिलिकॉन) या किसी इंसुलेटिंग सामग्री पर या उसके भीतर स्थायी रूप से समाहित होते हैं। इन घटकों को इस प्रकार आपस में जोड़ा जाता है कि यह सर्किट विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक कार्य जैसे प्रवर्धन (Amplification), सिग्नल प्रोसेसिंग या गणना (Computation) करने में सक्षम होता है।
सामान्यतः इन्हें चिप्स या माइक्रोचिप्स कहा जाता है। SIC आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मूल घटक होते हैं। ये जटिल कार्यों को छोटे आकार में संभव बनाते हैं और लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में पाए जाते हैं, जैसे कंप्यूटर, मोबाइल फोन, टेलीविजन, डिजिटल घड़ियाँ, चिकित्सा उपकरण, वाहन आदि। इनकी सूक्ष्म संरचना उच्च गति, ऊर्जा दक्षता और बड़े पैमाने पर उत्पादन को संभव बनाती है, जिससे ये डिजिटल एवं सूचना प्रौद्योगिकी युग की आधारशिला बनते हैं।
सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट (SIC) का लेआउट-डिज़ाइन
सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट (SIC) का लेआउट-डिज़ाइन उस त्रि-आयामी विन्यास या संरचना को दर्शाता है, जिसमें ट्रांजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तत्वों को सेमीकंडक्टर सामग्री पर पैटर्न के रूप में स्थापित किया जाता है, ताकि एक कार्यशील इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार हो सके।
यह डिज़ाइन मूलतः एक ब्लूप्रिंट या भौतिक नक्शा होता है, जो यह निर्धारित करता है कि विभिन्न घटकों को चिप के भीतर कैसे रखा और जोड़ा जाएगा ताकि वांछित कार्यक्षमता प्राप्त हो सके। यह केवल सर्किट के विद्युत कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि गेट्स, तारों और परतों की भौमितिक व्यवस्था और रूटिंग को भी शामिल करता है।
लेआउट-डिज़ाइन क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सीधे IC के प्रदर्शन, आकार, ऊर्जा दक्षता और गति को प्रभावित करता है।
लेआउट-डिज़ाइन व्यापक अनुसंधान एवं विकास (R&D) का परिणाम होता है, जिसमें भारी निवेश, न...
सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट (SIC) एक ऐसा उत्पाद होता है, जिसमें ट्रांजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटक (जैसे डायोड, रेसिस्टर और कैपेसिटर) एक सेमीकंडक्टर सामग्री (जैसे सिलिकॉन) या किसी इंसुलेटिंग सामग्री पर या उसके भीतर स्थायी रूप से समाहित होते हैं। इन घटकों को इस प्रकार आपस में जोड़ा जाता है कि यह सर्किट विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक कार्य जैसे प्रवर्धन (Amplification), सिग्नल प्रोसेसिंग या गणना (Computation) करने में सक्षम होता है।
सामान्यतः इन्हें चिप्स या माइक्रोचिप्स कहा जाता है। SIC आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मूल घटक होते हैं। ये जटिल कार्यों को छोटे आकार में संभव बनाते हैं और लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में पाए जाते हैं, जैसे कंप्यूटर, मोबाइल फोन, टेलीविजन, डिजिटल घड़ियाँ, चिकित्सा उपकरण, वाहन आदि। इनकी सूक्ष्म संरचना उच्च गति, ऊर्जा दक्षता और बड़े पैमाने पर उत्पादन को संभव बनाती है, जिससे ये डिजिटल एवं सूचना प्रौद्योगिकी युग की आधारशिला बनते हैं।
सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट (SIC) का लेआउट-डिज़ाइन
सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट (SIC) का लेआउट-डिज़ाइन उस त्रि-आयामी विन्यास या संरचना को दर्शाता है, जिसमें ट्रांजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तत्वों को सेमीकंडक्टर सामग्री पर पैटर्न के रूप में स्थापित किया जाता है, ताकि एक कार्यशील इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार हो सके।
यह डिज़ाइन मूलतः एक ब्लूप्रिंट या भौतिक नक्शा होता है, जो यह निर्धारित करता है कि विभिन्न घटकों को चिप के भीतर कैसे रखा और जोड़ा जाएगा ताकि वांछित कार्यक्षमता प्राप्त हो सके। यह केवल सर्किट के विद्युत कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि गेट्स, तारों और परतों की भौमितिक व्यवस्था और रूटिंग को भी शामिल करता है।
लेआउट-डिज़ाइन क्यों महत्वपूर्ण है?
- यह सीधे IC के प्रदर्शन, आकार, ऊर्जा दक्षता और गति को प्रभावित करता है।
- लेआउट-डिज़ाइन व्यापक अनुसंधान एवं विकास (R&D) का परिणाम होता है, जिसमें भारी निवेश, नवाचार और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
- चूँकि रिवर्स-इंजीनियरिंग के बाद इसे आसानी से कॉपी किया जा सकता है, इसलिए इसे बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।
भारत में SIC लेआउट-डिज़ाइन का कानूनी संरक्षण
भारत में सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट्स लेआउट-डिज़ाइन अधिनियम, 2000 मूल लेआउट-डिज़ाइनों के निर्माताओं को विशिष्ट अधिकार प्रदान करने के लिए अधिनियमित किया गया था।
मुख्य बिंदु:
- संरक्षण केवल उन मूल लेआउट-डिज़ाइनों को दिया जाता है जो विशिष्ट हों और कहीं भी व्यावसायिक रूप से उपयोग में न लाई गई हों।
- पंजीकरण की वैधता आवेदन की तिथि या व्यावसायिक उपयोग की तिथि, जो भी पहले हो, से 10 वर्षों तक होती है।
- पंजीकृत लेआउट-डिज़ाइन के स्वामी को इसे पुनरुत्पादित करने, बेचने और व्यावसायिक रूप से उपयोग करने का विशेष अधिकार प्राप्त होता है।
इंटीग्रेटेड सर्किट्स को IP संरक्षण की आवश्यकता क्यों होती है?
इंटीग्रेटेड सर्किट्स (ICs), विशेष रूप से उनके लेआउट-डिज़ाइन, को चिप पाइरेसी के बढ़ते खतरे के कारण बौद्धिक संपदा (IP) संरक्षण की आवश्यकता होती है। अक्सर IC का लेआउट वर्षों के अनुसंधान, निवेश और नवाचार का परिणाम होता है, जिसे आसानी से कॉपी कर पुनः निर्मित किया जा सकता है।
ऐसी नकली चिप्स, जो कार्य और रूप में मूल चिप्स के समान होती हैं, कम कीमत पर बेची जाती हैं, जिससे मूल डिज़ाइनरों और निर्माताओं को भारी वित्तीय नुकसान होता है।
इसके अतिरिक्त, पारंपरिक IP कानून IC लेआउट-डिज़ाइनों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर पाते। पेटेंट कानून में उच्च स्तर की नवीनता और आविष्कारशीलता की आवश्यकता होती है, जिसे लेआउट-डिज़ाइन हमेशा पूरा नहीं कर पाते, जबकि कॉपीराइट कानून तकनीकी और कार्यात्मक डिज़ाइनों के लिए पर्याप्त विशिष्ट नहीं है।
इसी अंतर को पहचानते हुए, भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट्स लेआउट-डिज़ाइन अधिनियम, 2000 को लागू किया, ताकि मूल IC लेआउट-डिज़ाइनों को विशेष अधिकार मिल सकें, पाइरेसी के विरुद्ध कानूनी संरक्षण हो सके और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
लेआउट-डिज़ाइन (SIC) के पंजीकरण की शर्तें
सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट्स लेआउट-डिज़ाइन अधिनियम, 2000 के अंतर्गत पंजीकरण के लिए लेआउट-डिज़ाइन को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- मौलिक (Original)
- लेआउट-डिज़ाइन निर्माता की स्वयं की बौद्धिक रचना होनी चाहिए और किसी अन्य डिज़ाइन से कॉपी नहीं होनी चाहिए।
- इसमें घटकों और उनके संयोजन में रचनात्मकता होनी चाहिए।
- विशिष्ट (Distinctive)
- डिज़ाइन में ऐसी विशिष्ट विशेषताएँ होनी चाहिए जो इसे मौजूदा डिज़ाइनों से अलग बनाती हों।
- यह सामान्य या उद्योग की प्रचलित पद्धति नहीं होनी चाहिए।
- पहचान योग्य (Capable of Distinguishing)
- यह किसी अन्य पंजीकृत लेआउट-डिज़ाइन से स्पष्ट रूप से अलग पहचाना जा सकने योग्य होना चाहिए।
- व्यावसायिक रूप से अप्रयुक्त
- आवेदन की तिथि से पहले भारत या किसी भी कन्वेंशन देश में इसका व्यावसायिक उपयोग नहीं किया गया होना चाहिए।
- इससे पंजीकरण के समय डिज़ाइन की नवीनता बनी रहती है।
वे लेआउट-डिज़ाइन जिन्हें पंजीकरण नहीं दिया जा सकता
सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट्स लेआउट-डिज़ाइन अधिनियम, 2000 के अनुसार, निम्नलिखित लेआउट-डिज़ाइन पंजीकरण के योग्य नहीं हैं:
- मौलिक न होने वाले
- यदि डिज़ाइन कॉपी किया गया हो या उसमें रचनात्मकता का अभाव हो।
- पहले से व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाए गए
- यदि डिज़ाइन आवेदन से पहले भारत या विदेश में व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाया गया हो।
- स्वभाव से विशिष्ट न होने वाले
- यदि डिज़ाइन सामान्य, मानक या उद्योग में प्रचलित हो।
- पहचान में अक्षम
- यदि डिज़ाइन किसी मौजूदा पंजीकृत डिज़ाइन से अत्यधिक समान हो।
लेआउट-डिज़ाइन का उल्लंघन क्या माना जाएगा?
यदि पंजीकृत स्वामी की अनुमति के बिना कोई व्यक्ति पंजीकृत लेआउट-डिज़ाइन का उपयोग करता है, तो इसे उल्लंघन माना जाएगा।
- लेआउट-डिज़ाइन का पूर्ण या आंशिक पुनरुत्पादन।
- लेआउट-डिज़ाइन को किसी उत्पाद, वस्तु या सेमीकंडक्टर IC में सम्मिलित करना।
- ऐसे उत्पादों को बेचना, आयात करना या वितरित करना जिनमें पंजीकृत लेआउट-डिज़ाइन शामिल हो।
इनमें से कोई भी कार्य, यदि स्वामी की अनुमति के बिना किया गया हो, तो वह उल्लंघन माना जाएगा और कानूनी कार्रवाई योग्य होगा।
क्या उल्लंघन नहीं माना जाएगा?
- वैज्ञानिक अध्ययन, अनुसंधान या शिक्षण के लिए उपयोग
- केवल अध्ययन, विश्लेषण, अनुसंधान या शिक्षा के उद्देश्य से लेआउट-डिज़ाइन का उपयोग उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
- स्वतंत्र रूप से निर्मित डिज़ाइन
- यदि कोई व्यक्ति बिना कॉपी किए, स्वयं के बौद्धिक प्रयास से समान डिज़ाइन बनाता है।
- ऐसे मामलों में प्रमाण देने की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति पर होगी।